Ticker

6/recent/ticker-posts

ओशो के सुविचार - Osho ki kahaniya

                                 Elephant, Young, Watering Hole

  Osho ke suvichar

 जीवन कभी भी पूर्ण नहीं होता; यह सतत बदल रहा है। एक समग्रता से दूसरी समग्रता तक, एक अपूर्णता से दूसरी अपूर्णता तक, यह चलता रहता है, चलता रहता है। अपूर्णता बस जीवन है, जीवंतता है, प्रगति है, विकास है। तो अपूर्णता की निंदा क्यों करना? अभी तुम्हें लगता है कि तुम महसूस करते हो कि मैं जैसा हूं पूर्ण हूं। तुम नहीं हो। लेकिन मैं यह नहीं कह रहा कि पूर्ण होने के प्रयास में जुट जाओ; तब फिर से वही जाल है। मैं कह रहा हूं कि तुम जहां भी हो, पूरी तरह से इसी क्षण में जियो – उसे जीने का यही एकमात्र ढंग है” --- ओशो.

जीवन कभी भी पूर्ण नहीं होता; यह सतत बदल रहा है। एक समग्रता से दूसरी समग्रता तक, एक अपूर्णता से दूसरी अपूर्णता तक, यह चलता रहता है, चलता रहता है। अपूर्णता बस जीवन है, जीवंतता है, प्रगति है, विकास है। तो अपूर्णता की निंदा क्यों करना? अभी तुम्हें लगता है कि तुम महसूस करते हो कि मैं जैसा हूं पूर्ण हूं। तुम नहीं हो। लेकिन मैं यह नहीं कह रहा कि पूर्ण होने के प्रयास में जुट जाओ; तब फिर से वही जाल है। मैं कह रहा हूं कि तुम जहां भी हो, पूरी तरह से इसी क्षण में जियो – उसे जीने का यही एकमात्र ढंग है” ----ओशो.

कठिनाई के इस समय में आपको क्या करना चाहिए?
"अधिक ध्यानपूर्वक हो जाओ, अपने अंतरतम के प्रति और चेतन हो जाओ। अपने भीतर के संसार को और मौन हो जाने दो, और प्रेम तुमसे बहने लगेगा" ---ओशो.


ओशो कहते हैं "ज़ेन एक अनुवाद नहीं है। ज़ेन को ऐसे सोचना जैसे कि यह एक अनुवाद है, शुरू से ही गलत तरीके से शुरू करना है। अनुवाद दिमाग से किआ जाता है ; और ज़ेन पूरी तरह से दिमाग से परे है। ज़ेन मन के ऊपर जाने की प्रक्रिया है, मन से बहुत दूर; यह मन को पार करने की, पारगमन की प्रक्रिया है। आप इसे मन से नहीं समझ सकते, मन का इसमें कोई कार्य नहीं है। "

“श्रद्धा तुम्हारे और आस्तित्व के बीच एक सेतू है। श्रद्धा प्रेम का शुद्धतम रूप है, और एक बार श्रद्धा मिट जाए, प्रेम भी असंभव हो जाता है” ओशो

Post a Comment

0 Comments