*प्रेम* : ओशो की नजर से प्रेम की यह मूलभूत जरूरत है कि, ‘मैं दूसरे व्यक्ति को जैसा वह है वैसा ही स्वीकार करता हूं।’ और प्रेम कभी भी व्यक्ति को …
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