|| परिवर्तन तो अहंकार की ही आंकांक्षा है; सदगुरु के पास आने से तुम मुक्त नहीं हो सकते, क्योंकि सदगुरु दीया है—एक रोशनी। उस रोशनी में तुम्हारे …
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